A Poem On Monsoon In Hindi

बारिश – A Poem On Monsoon by Nitu Saha  

ये बारिश….
बहुत खुबसुरत है ये बारिश का मौसम
एक एक बूँद किसी मोती से कम नहीं

खिल उठता है हरियाली चारो तरफ इन बारिश के दिनों में
और बज उठता है चारों तरफ छम -छम संगीत भी।

खुश होकर बच्चा भी नाचे , जवान भी झूमे और
बूढ़े भी गुन गुनाते है कभी -कभी ,

हर साल कितनी ही  यादें और सौगातें लेकरधरती पर आती है ये बारिश
कही पे आशीर्वाद बनकर गिरती है तो
कही पे अभिशाप भी बनकर गिरती है ये बारिश।

सच मुश्किलें तो तमाम आती  है इन बारिश के दिनों  में
लेकिन ये बारिश  इतनी भी तो ख़राब नहीं ,
जो दुःख और दर्द भुगतना पड़ता है इन बारिश के दिनों में हमें
इसमें बारिश की तो कोई क़सूर नहीं।

गलती तो हम इंसानो से ही हुई है
और सब ये मान भी रहे है अभी ,
हमने ही अपने हाथो से इस दुनिया का ये हाल किया है
फल भी हमे ही भुगतना होगा अभी।

मानते है आज विज्ञान बहुत शक्तिशाली हो चुकी है
लेकिन कुदरत से बड़ा कुछ भी नहीं ,
कुदरत कितना भयानक रूप ले सकता है
ये तो हम सब ने ही देखा है कभी न कभी।

ये कुदरत सब कुछ देता है तो सब कुछ छीन भी सकता है
क्या अभी तक हमने इस्से  कुछ सीखा नहीं ???
विकास के नाम पर कही हम विनाश को तो नहीं बुला रहे
अब  फिर से एकबार सोचना ही होगा हमें अभी।

दोस्तों कुदरत की हमेशा क़दर करना
धुप हो या बारिश सबका खुलके आनंद लेना
“जल ही जीवन है ” इस बात का भी हमेंशा ख्याल रखनाइसकी एक एक बूँद हमें  ही बचाना है
ये जिम्मेदारी भी तुम अच्छे से निभाना …

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