A Poem On Yoga in Hindi अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आधारित एक प्रेरणादायक कविता

A poem on yoga in Hindi

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आधारित एक प्रेरणादायक कविता

हमारें पूर्वजों से मिला ये योग एक अनमोल उपहार है
लेकिन अफ़सोस .. मैंने इसकी कीमत बहुत देर से जाना है
लेकिन जब से इसे जाना है तब से ये जिंदगी कुछ बदल सी गई है
अब तो हर दिन ही शुक्रिया कहती हूँ मैं इस योग को
क्यूंकि इसने मेरी बहुत मदद की है
बहुत मदद की है।

एक वक़्त ऐसा भी आया मेरे जीवन में जब हर तरफ मुझे सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा नजर आ रहा था
आत्मविश्वास मैं खो चुकी थी और ये जिंदगी एक बोझ जैसा लगने लगा था।

तब फिर से मैंने एक नई रोश्नी की तलाश शुरू की
एक दिन ऐसे ही बिना सोचें -समझें  मैंने योग को अपना लिया  …

फिर देखा धीरे धीरे मेरे जीवन में भी नयापन आने लगी
जो जो पहले खो चुकी थी वो सब भी धीरे धीरे मुझे वापस मिलने लगी ;

जो बातें पहले डॉक्टर साहब को बताने में शर्माती थी ,कतराती थी
अब तो वो बातें रही ही नहीं

आत्मसंतुष्टि भी मुझे मिली और परमानन्द की भी मुझे प्राप्ति हो गई।

ये जो सफर रहा मेरा एक शानदार सफर रहा
जो आज भी जारी है
ये जिंदगी मेरी फिर से खूबसूरत बन गई

जिस उद्देश्य को लेकर ये सफर शुरू किया था मैंने
आज वो उद्देश्य भी मेरी पूरी हो गई
सच में पूरी हो गई  …

इसलिए अब सबसे मैं  बस एक ही बात कहती हूँ  कि
ये योग चमत्कारी है
इसे एक दवाई की तरह लेना तुम हर दिन
ये इंसान को पूरी तरह से निरोगी बना सकता है
पूरी तरह से निरोगी बना सकता है।

आप सभी इसे अपनाओ
आपको सूख और शान्ति तमाम मिलेगी
चेहरा खिल उठेगा आपका , आप ऊर्जावान बनोगे
शारीरिक और मानसिक रूप से आपको तमाम शांति मिलेगी ,बहुत सुकून मिलेगी।

कबीर कहते है  “जो कल करे सो आज , आज करे सो अभी “
अगर आप भी इसे  सीखना चाहते हो तो शुरू कर दो अभी
अभी के अभी।

मान लो और ठान लो
पूरे विश्वास और लगन के साथ आप अभ्यास शुरू कर दो
इसे एक आदत बना लो और अपने दिनचर्या में भी इसे हमेशा के लिए शामिल कर लो

ये सब के लिए है
इसलिए आप खर्चे की चिंता बिल्कुल मत करो
कम खर्चे में भी ये बहुत लाभ देता है
इसलिए आप इसे आज और अभी अपनालो
आज और अभी अपनालो।

दोस्तों मुझे जो बात कहनी थी इस कविता के माध्यम से मैंने वो कह दी
अब बारी आपकी है

दो- तीन साल पहले मैंने एक संकल्प ली थी
अब आप सब को भी लेना है

आप अब और देरी बिलकुल मत करो
इस योग दिवस पर आप भी एक एक संकल्प ले लो
हमेशा खुश रहो ,हमेशा स्वास्थ रहो
और
अपनी अपनी जिंदगी जी भर के जिओ
जी भर के जिओ…

A spoken word poetry on Yoga by Nitu Saha

6th International Day Of Yoga

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